Tuesday, February 17, 2015

प्रदुशण कि सम्स्या और समाधन
रूप्रेरेखा-प्रस्तवना-प्रदुशण का अर्थ-प्रदुशण के कारण‌ ‌- ‌प्रदुशण के प्रकार- वायु,जल,ध्वनि,भूमि प्रदुशण-प्रदुशण के दुश्परिनाम- प्रदुशण से बचने के उपाय- उप्सन्हार ।
आज का युग विज्ञान का युग है । विज्ञान से जहाँ मनुश्य को कुछ वरदान मिले हैं, वहीं कुछ अभिशाप भी मिले हैं | प्रदुशण भी विज्ञान-प्रदूत ऐसा ही अभिशाप है | आज प्रदूषण किसी एक देश तक सीमित ना रहकर विश्व-व्यापी समस्या बन गया है, जिससे सम्पुर्ण मानव- जाती त्रस्त है |
‘प्रदूषण’ शब्द ‘दुषण’ मे ‘प्र’ उपसर्ग लगाकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ है खराबी या दूषित होना | यहाँ प्रदूषण से तात्पर्य है -प्राकृतिक संतुलन मे दोष पैदा होना; शूध वायु, जल, खाद्या पदार्थों का अभाव; वातावरण मे अशांति |
प्रदूषण के अनेक कारण हैं | वनों की अंधाधुंद क्टयि, महानगरों का फैलाव, यातायात के साधनों तथा कल कार्खानो का शोर, धुआँ और व्यर्थ पधार्थ, रास्नायिक खाड़ों का प्रयोग आदि प्रमुख कारण है ।
इन सब से प्रकृति का स्वाभाविक संतुलन बिग्ड़्ता है | पेधों के अभाव मे ऑक्सिजन की कमी, ऋतु-चक्र मे अनिमियता, जीव जंतुओं का अभाव तथा भूमिकटाव जैसी स्मसाएँ उत्पन्न हो रही हैं |

प्रदूषण से पूर्णतः मुक्ति पाना आज शायद संभव नही है क्यूंकी हम वैज्ञानिक उपलब्धियों को त्याग कर नही जी सकते, किंतु यदि सावधानी से काम लिया जाए तो प्रदूषण के दुष्परिणामो को कुछ कम किया जा सकता है | व्रिक्शरोपण को बढावा देकर, कार्खानो कि चिम्नियान उंचि करके, वाह्नो की ध्वनि और धुए कि समय समय पर जांच करवा कर, रेडियो, लाउड स्पीकर की ध्वनि कम रखकर हम प्रदूषण पर कुछ हड्द तक नियंत्रण कर सकते हैं |
इस प्रकार कहा जा सकता है की प्रदूषण आज एक अत्यंत गंभीर समस्या बन गया है | संपुरण विश्व इससे चिंतित है | वैज्ञानिक प्रगति, औद्योगिक क्रांति तथा आधुनिक सभ्यता सभी का मकसद मानव को सुखी, समरध और स्वस्थ बनाना है | प्रदूषण इसमे सबसे बड़ी बाधा है | उसे दूर करने के लिए और मानव सभ्यता की रक्षा के लिए हम सबको मिलजुल कर प्रयत्न करना होगा | - See more at: http://hindiessay.in/pollution-problems-solution-essay-in-hindi/#sthash.OStuQyf1.dpuf

प्रदूषण मुक्ति के लिए जन सहभागिता जरूरी

प्रदूषण मुक्ति के लिए जन सहभागिता जरूरी


उदयपुर/ संभागीय आयुक्त श्रीमती अपर्णा अरोरा ने कहा कि आयड नदी के गंदे पानी की समस्या के समाधान एवं उदयसागर में प्रदूषण मुक्ति के लिए जन सहभागिता जरूरी है। 
संभागीय आयुक्त बुधवार को संभागीय आयुक्त कार्यालय सभागार में सृष्टि ईको रिसर्च इन्स्टीट्यूट पूना के मुख्य वैज्ञानिक एवं सलाहकार (झील संरक्षण समिति) डा.संदीप जोशी के स्लाइड प्रदर्शन कार्यक्रम संबंधी बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने उद्योगपतियों, गैर सरकारी संगठनों एवं आमजन का आह्वान कि वे आयड नदी को उसका मूल स्वरूप प्रदान करने तथा उदयसागर को स्वच्छ बनाने में सहयोग करें। 
बैठक में इन्स्टीट्यूट के मुख्य वैज्ञानिक डॉ.संदीप जोशी ने संस्थान द्वारा नदियों व झीलों पर किये गये सुधार कार्यों का प्रस्तुतिकरण स्लाइड प्रदर्शन के माध्यम से किया गया तथा बताया कि आयड नदी को स्वच्छता प्रदान करने के लिए पायलेट प्रोजेक्ट एक महिने में सम्पादित किया जा सकता है जिस पर लगभग 3॰ लाख रुपया व्यय होगा। 
संदीप जोशी द्वारा आयड नदी के दूषित जल को ‘‘हरित तकनीकी’’ द्वारा उपचारित करने पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस तकनीकी में स्थानीय वनस्पति तथा कतिपय ‘‘ईको टेक्नोलॉजिकल’’ तरीकों से बिना बिजली खर्च, बिना केमिकल के औद्योगिक एवं शहरी सिपेज को उपचारित किया जा सकता है। 
बैठक में जानकारी दी गई कि मटून पंचायत व कानपुर ग्रामवासियों के सहयोग तथा उद्योग जगत, महाराणा मेवाड चेरिटेबल फाउण्डेशन एवं स्वैच्छिक संस्थाओं की मदद से सूखा नाका क्षेत्र में इस तकनीक को स्थापित करने पर आगामी कुछ दिनों में निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर पूर्व विदेश सचिव जगत मेहता ने आयड एवं उदयसागर की स्वच्छता के कार्य को एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए प्रयासों की सराहना की। 
बैठक में अतिरिक्त संभागीय आयुक्त आर.पी.शर्मा, नगर परिषद आयुक्त बालमुकुन्द असावा, नगर विकास प्रन्यास सचिव मोहम्मद फुरकान खान, झील संरक्षण समिति के डा.तेज राजदान, विद्याभवन पॉलिटेक्निक के विभागाध्यक्ष अनिल मेहता, यूसीसीआई के संरक्षक अरविन्द सिंघल, अध्यक्ष वीरेन्द्र सिरोया, महाराणा मेवाड फाउण्डेशन के उपसचिव मयंक गुप्ता सहित सार्वजनिक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। 

प्रदूषण मुक्ति से स्वस्थ समाज की कल्पना संभव


स्वस्थ समाज की परिकल्पना प्रदूषण मुक्ति से की जा सकती है। अस्पताल में गायत्री परिवार ने रविवार को ऐसे ही संदेशों के साथ सफाई अभियान चलाया। बड़ी संख्या में सामाजिक संगठनों व समाजसेवियों ने भागीदारी की। 
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अध्यक्ष रमेश शर्मा ने कहा सार्वजनिक स्थानों पर पसरी गंदगी समाज की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। स्वयं के श्रम के प्रति निष्ठा समाप्त हो रही है। आज हर व्यक्ति, समाज व जिम्मेदार यह मान बैठा है यह दायित्व शासन व प्रशासन का है। स्वयं का दायित्व समझना व खुद ऐसे श्रमदान की पहल कर क्षेत्र विशेष को सुधारने के जरूरत महसूस की जा रही है। गायत्री परिवार का अभियान ऐसी ही उम्मीदों को जगा रहा है। नपाध्यक्ष कुसुम गुप्ता, वाल्मीकि समाज अध्यक्ष राजाराम तंवर, शिक्षाविद रमेशचंद्र चंद्रे, पशुपतिनाथ मंदिर समिति सदस्य सुशील गुप्ता, सिंधी समाज के सुंदरदास नैनवानी, समाजसेवी बंशीलाल टांक, ललित भारद्वाज ने भी संबोधित किया। 
ये रहे भागीदार
अभियान में जिला अस्पताल परिसर, प्रसूतिगृह उद्यान, गलियारा सहित अन्य क्षेत्रों की सफाई की।महिला कांग्रेस अध्यक्ष बबीतासिंह तोमर, मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ अध्यक्ष सतीष नागर, महर्षि गौतम साख संस्था के अध्यक्ष जी.के. व्यास, स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी महासंघ के सचिव यशवंत पाठक, बचपन बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष राघवेंद्रसिंह तोमर, अभिषेक तिवारी, धर्मवीर गुप्ता, हेमंत सोनी, कृष्णगोपाल सोमानी, अशोक धनोतिया, सुनील बंसल ने भागीदारी की। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों- अधिकारियों ने सिविल सर्जन डॉ. एस.एस. वर्मा के मार्गदर्शन में श्रमदान किया। महिला मंडल की सुशीला त्रिवेदी, विद्या उपाध्याय, प्रज्ञा, मेघा, माया चौहान, शांति पाटीदार, निरंजना गौड़ ने भी टोली बनाकर श्रमदान किया। श्रमदान सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चला।


                                   प्रदूषण मुक्ति व विद्युत आत्मनिर्भरता की पहल


प्रदूषण मुक्ति व विद्युत आत्मनिर्भरता की दिशा में स्थानीय वस्त्र कारोबारी ने नई पहल की है। ऊर्जा के विकल्प के रूप में सौर ऊर्जा को चुन उसने लाखों रूपए खर्च कर कार्य स्थल पर सोलर संयंत्र लगाया है। 


पोपलीन नगरी के नाम से देश में प्रसिद्ध बालोतरा के साथ प्रदूषणरूपी कलंक भी जुड़ा हुआ है। कारखानों के संचालन से जल प्रदूषण इस कदर बढ़ गया कि राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित प्रदूषित पानी को खुले में बहाने पर रोक के आदेश जारी किए। वायु प्रदूषण की रोकथाम को लेकर अब तक कोईप्रभावी कार्रवाईनहीं की गई है। प्रदेश मे बिजली का संकट खड़ा होने पर वस्त्र उद्योग भी प्रभावित होता है।कई वर्षो से चली आ रही इन समस्याओं के समाधान की दिशा में नगर के एक वस्त्र कारोबारी ने नईपहल की है।

नई सोच-नई राह 


वस्त्र उद्यमी नेमीचंद मेहता ने अपने कार्यस्थल पर बारह लाख रूपए की लागत से 10 किलो वाट क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट लगाया जिससे प्रतिदिन औसत 50 यूनिट बिजली उत्पादित होती है। यह कार्यकी जरूरत मुताबिक पर्याप्त है।


फायदा ही फायदा 

सौर ऊर्जा संयंत्र से कारोबारी की कई समस्याओं का हल हुआ है।पूर्व में बिजली नहीं रहने पर जनरेटर काम में लेना पड़ता था। जिसका खर्च महंगा था। इससे वायु व ध्वनि प्रदूषण भी झेलना पड़ता था। सौर ऊर्जा से बिजली को लेकर वह आत्म निर्भर हैं। महंगी बिजली की जरूरत नहीं रहने से बड़ी बचत भी हो रही है। एक बार संयंत्र लगाने पर बीस से पच्चीस वर्षतक विद्युत मिलती है। इसके रखरखाव का भी कोईबड़ा खर्च नहीं है। बिजली कटौती में किसी तरह की परेशानी भी नहीं झेलनी पड़ेगी। 

उद्यमियों को मिली नई दिशा 


बालोतरा, जसोल व बिठूजा में वस्त्रधुपाई-रंगाई-छपाई के करीब एक हजार वस्त्र कारखाने हैं। इनमें कामकाज मेें हर दिन बिजली की बड़ी खपत रहती है। बिजली कटौती पर उद्यमी जनरेटर का प्रयोग करते हैं। जिसका संचालन महंगा पड़ता है। वहीं उन्हे प्रदूषण की समस्या भी झेलनी पड़ती है। ऎसे में नगर के एक कारोबारी की ओर से लगाया गया यह सौर ऊर्जा का संयंत्र आने वाले दिनों में उद्यमियों को नई दिशा देगा। 


खुशी व राहत

ग्रीन ऊर्जा को लेकर मैं उत्साहित हूं। अपने कार्य स्थल पर सौर ऊर्जा का संयंत्र लगाया। इससे मुझे जरूरत के हिसाब से अच्छी ऊर्जा मिल रही है। वहीं प्रदूषण से मिली मुक्ति पर मुझे खुशी भी है।नेमीचंद मेहता, कारोबारी

असीम संभावना 


सौर ऊर्जा की देश में असीम संभावनाएं हैं।हमारे यहां वर्षमें 300 से 320 दिनों तक सूर्य चमकता है।सूर्यकी किरणें तेज पड़ती है। जिससे अच्छी बिजली उत्पादित होती है।बालोतरा में प्रथम बार उद्योग क्षेत्र में यह संयंत्रलगाया है।बरसात, सर्दी में भी इससे अच्छी बिजली प्राप्त होगी।बादल छाए रहने पर भी यह सुचारू रहेगा। प्रदूषण व बिजली संकट को झेलते उद्योग के लिए यह कदम पथ प्रदर्शक बनेगा। पीयूष्ा गुप्ता, इलेक्ट्रीकल इंजीनियर, आईआईटी वाराणसी

धर्मवीर दवे ञ्च