प्रदूषण मुक्ति के लिए जन सहभागिता जरूरी
उदयपुर/ संभागीय आयुक्त श्रीमती अपर्णा अरोरा ने कहा कि आयड नदी के गंदे पानी की समस्या के समाधान एवं उदयसागर में प्रदूषण मुक्ति के लिए जन सहभागिता जरूरी है।
संभागीय आयुक्त बुधवार को संभागीय आयुक्त कार्यालय सभागार में सृष्टि ईको रिसर्च इन्स्टीट्यूट पूना के मुख्य वैज्ञानिक एवं सलाहकार (झील संरक्षण समिति) डा.संदीप जोशी के स्लाइड प्रदर्शन कार्यक्रम संबंधी बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने उद्योगपतियों, गैर सरकारी संगठनों एवं आमजन का आह्वान कि वे आयड नदी को उसका मूल स्वरूप प्रदान करने तथा उदयसागर को स्वच्छ बनाने में सहयोग करें।
बैठक में इन्स्टीट्यूट के मुख्य वैज्ञानिक डॉ.संदीप जोशी ने संस्थान द्वारा नदियों व झीलों पर किये गये सुधार कार्यों का प्रस्तुतिकरण स्लाइड प्रदर्शन के माध्यम से किया गया तथा बताया कि आयड नदी को स्वच्छता प्रदान करने के लिए पायलेट प्रोजेक्ट एक महिने में सम्पादित किया जा सकता है जिस पर लगभग 3॰ लाख रुपया व्यय होगा।
संदीप जोशी द्वारा आयड नदी के दूषित जल को ‘‘हरित तकनीकी’’ द्वारा उपचारित करने पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस तकनीकी में स्थानीय वनस्पति तथा कतिपय ‘‘ईको टेक्नोलॉजिकल’’ तरीकों से बिना बिजली खर्च, बिना केमिकल के औद्योगिक एवं शहरी सिपेज को उपचारित किया जा सकता है।
बैठक में जानकारी दी गई कि मटून पंचायत व कानपुर ग्रामवासियों के सहयोग तथा उद्योग जगत, महाराणा मेवाड चेरिटेबल फाउण्डेशन एवं स्वैच्छिक संस्थाओं की मदद से सूखा नाका क्षेत्र में इस तकनीक को स्थापित करने पर आगामी कुछ दिनों में निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर पूर्व विदेश सचिव जगत मेहता ने आयड एवं उदयसागर की स्वच्छता के कार्य को एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए प्रयासों की सराहना की।
बैठक में अतिरिक्त संभागीय आयुक्त आर.पी.शर्मा, नगर परिषद आयुक्त बालमुकुन्द असावा, नगर विकास प्रन्यास सचिव मोहम्मद फुरकान खान, झील संरक्षण समिति के डा.तेज राजदान, विद्याभवन पॉलिटेक्निक के विभागाध्यक्ष अनिल मेहता, यूसीसीआई के संरक्षक अरविन्द सिंघल, अध्यक्ष वीरेन्द्र सिरोया, महाराणा मेवाड फाउण्डेशन के उपसचिव मयंक गुप्ता सहित सार्वजनिक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
संभागीय आयुक्त बुधवार को संभागीय आयुक्त कार्यालय सभागार में सृष्टि ईको रिसर्च इन्स्टीट्यूट पूना के मुख्य वैज्ञानिक एवं सलाहकार (झील संरक्षण समिति) डा.संदीप जोशी के स्लाइड प्रदर्शन कार्यक्रम संबंधी बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने उद्योगपतियों, गैर सरकारी संगठनों एवं आमजन का आह्वान कि वे आयड नदी को उसका मूल स्वरूप प्रदान करने तथा उदयसागर को स्वच्छ बनाने में सहयोग करें।
बैठक में इन्स्टीट्यूट के मुख्य वैज्ञानिक डॉ.संदीप जोशी ने संस्थान द्वारा नदियों व झीलों पर किये गये सुधार कार्यों का प्रस्तुतिकरण स्लाइड प्रदर्शन के माध्यम से किया गया तथा बताया कि आयड नदी को स्वच्छता प्रदान करने के लिए पायलेट प्रोजेक्ट एक महिने में सम्पादित किया जा सकता है जिस पर लगभग 3॰ लाख रुपया व्यय होगा।
संदीप जोशी द्वारा आयड नदी के दूषित जल को ‘‘हरित तकनीकी’’ द्वारा उपचारित करने पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। इस तकनीकी में स्थानीय वनस्पति तथा कतिपय ‘‘ईको टेक्नोलॉजिकल’’ तरीकों से बिना बिजली खर्च, बिना केमिकल के औद्योगिक एवं शहरी सिपेज को उपचारित किया जा सकता है।
बैठक में जानकारी दी गई कि मटून पंचायत व कानपुर ग्रामवासियों के सहयोग तथा उद्योग जगत, महाराणा मेवाड चेरिटेबल फाउण्डेशन एवं स्वैच्छिक संस्थाओं की मदद से सूखा नाका क्षेत्र में इस तकनीक को स्थापित करने पर आगामी कुछ दिनों में निर्णय लिया जाएगा। इस मौके पर पूर्व विदेश सचिव जगत मेहता ने आयड एवं उदयसागर की स्वच्छता के कार्य को एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए प्रयासों की सराहना की।
बैठक में अतिरिक्त संभागीय आयुक्त आर.पी.शर्मा, नगर परिषद आयुक्त बालमुकुन्द असावा, नगर विकास प्रन्यास सचिव मोहम्मद फुरकान खान, झील संरक्षण समिति के डा.तेज राजदान, विद्याभवन पॉलिटेक्निक के विभागाध्यक्ष अनिल मेहता, यूसीसीआई के संरक्षक अरविन्द सिंघल, अध्यक्ष वीरेन्द्र सिरोया, महाराणा मेवाड फाउण्डेशन के उपसचिव मयंक गुप्ता सहित सार्वजनिक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मण्डल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
No comments:
Post a Comment