प्रदूषण मुक्ति व विद्युत आत्मनिर्भरता की पहल
प्रदूषण मुक्ति व विद्युत आत्मनिर्भरता की दिशा में स्थानीय वस्त्र कारोबारी ने नई पहल की है। ऊर्जा के विकल्प के रूप में सौर ऊर्जा को चुन उसने लाखों रूपए खर्च कर कार्य स्थल पर सोलर संयंत्र लगाया है।
पोपलीन नगरी के नाम से देश में प्रसिद्ध बालोतरा के साथ प्रदूषणरूपी कलंक भी जुड़ा हुआ है। कारखानों के संचालन से जल प्रदूषण इस कदर बढ़ गया कि राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित प्रदूषित पानी को खुले में बहाने पर रोक के आदेश जारी किए। वायु प्रदूषण की रोकथाम को लेकर अब तक कोईप्रभावी कार्रवाईनहीं की गई है। प्रदेश मे बिजली का संकट खड़ा होने पर वस्त्र उद्योग भी प्रभावित होता है।कई वर्षो से चली आ रही इन समस्याओं के समाधान की दिशा में नगर के एक वस्त्र कारोबारी ने नईपहल की है।
नई सोच-नई राह
वस्त्र उद्यमी नेमीचंद मेहता ने अपने कार्यस्थल पर बारह लाख रूपए की लागत से 10 किलो वाट क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट लगाया जिससे प्रतिदिन औसत 50 यूनिट बिजली उत्पादित होती है। यह कार्यकी जरूरत मुताबिक पर्याप्त है।
फायदा ही फायदा
सौर ऊर्जा संयंत्र से कारोबारी की कई समस्याओं का हल हुआ है।पूर्व में बिजली नहीं रहने पर जनरेटर काम में लेना पड़ता था। जिसका खर्च महंगा था। इससे वायु व ध्वनि प्रदूषण भी झेलना पड़ता था। सौर ऊर्जा से बिजली को लेकर वह आत्म निर्भर हैं। महंगी बिजली की जरूरत नहीं रहने से बड़ी बचत भी हो रही है। एक बार संयंत्र लगाने पर बीस से पच्चीस वर्षतक विद्युत मिलती है। इसके रखरखाव का भी कोईबड़ा खर्च नहीं है। बिजली कटौती में किसी तरह की परेशानी भी नहीं झेलनी पड़ेगी।
उद्यमियों को मिली नई दिशा
बालोतरा, जसोल व बिठूजा में वस्त्रधुपाई-रंगाई-छपाई के करीब एक हजार वस्त्र कारखाने हैं। इनमें कामकाज मेें हर दिन बिजली की बड़ी खपत रहती है। बिजली कटौती पर उद्यमी जनरेटर का प्रयोग करते हैं। जिसका संचालन महंगा पड़ता है। वहीं उन्हे प्रदूषण की समस्या भी झेलनी पड़ती है। ऎसे में नगर के एक कारोबारी की ओर से लगाया गया यह सौर ऊर्जा का संयंत्र आने वाले दिनों में उद्यमियों को नई दिशा देगा।
खुशी व राहत
ग्रीन ऊर्जा को लेकर मैं उत्साहित हूं। अपने कार्य स्थल पर सौर ऊर्जा का संयंत्र लगाया। इससे मुझे जरूरत के हिसाब से अच्छी ऊर्जा मिल रही है। वहीं प्रदूषण से मिली मुक्ति पर मुझे खुशी भी है।नेमीचंद मेहता, कारोबारी
असीम संभावना
सौर ऊर्जा की देश में असीम संभावनाएं हैं।हमारे यहां वर्षमें 300 से 320 दिनों तक सूर्य चमकता है।सूर्यकी किरणें तेज पड़ती है। जिससे अच्छी बिजली उत्पादित होती है।बालोतरा में प्रथम बार उद्योग क्षेत्र में यह संयंत्रलगाया है।बरसात, सर्दी में भी इससे अच्छी बिजली प्राप्त होगी।बादल छाए रहने पर भी यह सुचारू रहेगा। प्रदूषण व बिजली संकट को झेलते उद्योग के लिए यह कदम पथ प्रदर्शक बनेगा। पीयूष्ा गुप्ता, इलेक्ट्रीकल इंजीनियर, आईआईटी वाराणसी
धर्मवीर दवे ञ्च
पोपलीन नगरी के नाम से देश में प्रसिद्ध बालोतरा के साथ प्रदूषणरूपी कलंक भी जुड़ा हुआ है। कारखानों के संचालन से जल प्रदूषण इस कदर बढ़ गया कि राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित प्रदूषित पानी को खुले में बहाने पर रोक के आदेश जारी किए। वायु प्रदूषण की रोकथाम को लेकर अब तक कोईप्रभावी कार्रवाईनहीं की गई है। प्रदेश मे बिजली का संकट खड़ा होने पर वस्त्र उद्योग भी प्रभावित होता है।कई वर्षो से चली आ रही इन समस्याओं के समाधान की दिशा में नगर के एक वस्त्र कारोबारी ने नईपहल की है।
नई सोच-नई राह
वस्त्र उद्यमी नेमीचंद मेहता ने अपने कार्यस्थल पर बारह लाख रूपए की लागत से 10 किलो वाट क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट लगाया जिससे प्रतिदिन औसत 50 यूनिट बिजली उत्पादित होती है। यह कार्यकी जरूरत मुताबिक पर्याप्त है।
फायदा ही फायदा
सौर ऊर्जा संयंत्र से कारोबारी की कई समस्याओं का हल हुआ है।पूर्व में बिजली नहीं रहने पर जनरेटर काम में लेना पड़ता था। जिसका खर्च महंगा था। इससे वायु व ध्वनि प्रदूषण भी झेलना पड़ता था। सौर ऊर्जा से बिजली को लेकर वह आत्म निर्भर हैं। महंगी बिजली की जरूरत नहीं रहने से बड़ी बचत भी हो रही है। एक बार संयंत्र लगाने पर बीस से पच्चीस वर्षतक विद्युत मिलती है। इसके रखरखाव का भी कोईबड़ा खर्च नहीं है। बिजली कटौती में किसी तरह की परेशानी भी नहीं झेलनी पड़ेगी।
उद्यमियों को मिली नई दिशा
बालोतरा, जसोल व बिठूजा में वस्त्रधुपाई-रंगाई-छपाई के करीब एक हजार वस्त्र कारखाने हैं। इनमें कामकाज मेें हर दिन बिजली की बड़ी खपत रहती है। बिजली कटौती पर उद्यमी जनरेटर का प्रयोग करते हैं। जिसका संचालन महंगा पड़ता है। वहीं उन्हे प्रदूषण की समस्या भी झेलनी पड़ती है। ऎसे में नगर के एक कारोबारी की ओर से लगाया गया यह सौर ऊर्जा का संयंत्र आने वाले दिनों में उद्यमियों को नई दिशा देगा।
खुशी व राहत
ग्रीन ऊर्जा को लेकर मैं उत्साहित हूं। अपने कार्य स्थल पर सौर ऊर्जा का संयंत्र लगाया। इससे मुझे जरूरत के हिसाब से अच्छी ऊर्जा मिल रही है। वहीं प्रदूषण से मिली मुक्ति पर मुझे खुशी भी है।नेमीचंद मेहता, कारोबारी
असीम संभावना
सौर ऊर्जा की देश में असीम संभावनाएं हैं।हमारे यहां वर्षमें 300 से 320 दिनों तक सूर्य चमकता है।सूर्यकी किरणें तेज पड़ती है। जिससे अच्छी बिजली उत्पादित होती है।बालोतरा में प्रथम बार उद्योग क्षेत्र में यह संयंत्रलगाया है।बरसात, सर्दी में भी इससे अच्छी बिजली प्राप्त होगी।बादल छाए रहने पर भी यह सुचारू रहेगा। प्रदूषण व बिजली संकट को झेलते उद्योग के लिए यह कदम पथ प्रदर्शक बनेगा। पीयूष्ा गुप्ता, इलेक्ट्रीकल इंजीनियर, आईआईटी वाराणसी
धर्मवीर दवे ञ्च
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